स्पाइस |Spice mahan logo ki kahaniya in hindi| Hindi Kahaniya

1990 के दशक की शुरुआत में भारत में नरसिम्हाराव के नेतृत्व वाली सरकार ने लाइसेन्सराज की चूलें हिला दी थी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की सफेद हाथी जैसी कम्पनियों में से अपनी हिस्सेदारी बेचने की कवायद भी शुरू की। नये-नये क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिये खोल दिया गया लेकिन आर्थिक उदारीकरण की इस प्रक्रिया में ग्लोबलाइजेशन की भी अहम भूमिका थी। भारत सरकार ने भी दुनिया के विकसित देशों से अपने सम्पर्क बढ़ाने शुरू किये यानि आर्थिक उदारीकरण की इस प्रक्रिया को लिबरेलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन जैसे तीन शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है।

आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया के तेजी पकड़ने से भारत में ना सिर्फ विदेशी निवेश की बाढ़ सी आ गई, बहुरा‌ष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में अपने कारोबार शुरू किये तो भारतीय कम्पनियों को भी नई तकनीक और नई रणनीति का उपयोग करने का मौका मिला। कारोबार करने के नये मौके मिलने से छोटी-छोटी भारतीय कम्पनियों के कारोबार में तेजी से इजाफा आया। भारती एयरटेल, स्पाइस, सत्यम जैसी सैकड़ों कम्पनियां जिनका नाम आज बड़े आदर से लिया जाता है, सभी उदारीकरण के बाद की स्थापित हुई थी।

उदरीकरण के पहले जब विशाल बाजार के बावजूद बहुरा‌ष्ट्रीय कम्पनियां भारत में प्रवेश करने का निर्णय नहीं कर पा रही थीं, ऐसे समय में उद्योगपति डॉक्टर बी. के. मोदी ने एल्काटेल, जेरॉक्स, टेल्स्ट्रा से समझौते कर उन्हें भारत में कारोबार करने के लिये प्रोत्साहित किया। बी.के. मोदी ने देश में कारोबार में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका, सरकारी दफ्तरों में आधुनिक तकनीक के प्रवेश की शुरुआत और दूरसंचार क्षेत्र में आ रही क्रांति को देखते हुये ऑफिस ऑटोमेशन और दूरसंचार क्षेत्र में हाथ आजमाने का निर्णय लिया। 1995 आते-आते बी.के. मोदी समूह के पोर्टफोलियो में फोटो कॉपी मशीन के लिये मोदी जेरॉक्स, एवियेशन में मोदी लुफ्त, कम्प्यूटर हार्डवेयर में मोदी ओलीवेट्टी और दूरसंचार उपकरणों के क्षेत्र में मोदी एल्काटेल शामिल हो गई लेकिन उदारीकरण के बाद के दौर में मोदी ने इन सभी संयुक्त उपक्रमों को बंद कर दिया और अपना पूरा ध्यान मोबाइल टेलीफोनी, आईटी सेवाओं और रियल एस्टेट पर केंदि्रत करने का निर्णय लिया। वर्ष 2008 में मोदी समूह ने पंजाब और कर्नाटक में मोबाइल सेवायें दे रही अपनी कम्पनी स्पाइस कम्यूनिकेशन में से अपनी हिस्सेदारी बेच दी। स्पाइस कम्यूनिकेशन में मोदी समूह की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी थी जिसे आदित्य बिडला समूह ने 22 अरब रुपये में खरीदकर स्पाइस कम्यूनिकेशन को अपने टेलीकॉम ब्रांड आइडिया का हिस्सा बना लिया।

वर्ष 2008 में बीके मोदी समूह के पोर्टफोलियो में मोबाइल के लिये वेल्यू-एडेड सर्विस देने वाली कम्पनी सेलेब्रम, मोबाइल हैंडसैट ब्रांड स्पाइस मोबाइल लिमिटेड, मोबाइल रिटेल ब्रांड हॉटस्पॉट, बीपीओ सर्विस ऑम्निया, एंटरटेनमेंट और मल्टीप्लेक्स ब्रांड स्पाइस वल्र्ड शामिल हो गये। समूह की मोबाइल वैल्यू-एडेड सेवा देने वाली कम्पनी सेलेब्रम का स्पाइस मोबाइल्स, आइडिया सेल्यूलर और रिलायंस कम्यूनिकेशन के साथ गठजोड़ था। सेलेब्रम मोबाइल वैल्यू-एडेड के सभी क्षेत्रों टेक प्लेटफॉर्म सॉल्यूशन, गेमिंग और मोबाइल माèर्5; ेटिंग की सेवायें दे रही थी।

स्पाइस मोबाइल्स मोबाइल हैंडसैट बेचने का कारोबार कर रही थी और राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाजारों में बड़ी हिस्सेदारी पर काबिज थी। कम्पनी की मोबाइल हैंडसैट के बाजार में अच्छी हिस्सेदारी का राज यह था कि कम्पनी सस्ते, मिड और प्रीमियम सैगमेंट के हैंडसैट बेच रही थी। हॉटस्पॉट मोबाइल से सम्बंधित उत्पादों का रिटेल कारोबार कर रही थी। हॉटस्पॉट की शुरुआत वर्ष 2005 में सिर्फ 15 कर्मचारियों के साथ हुई थी लेकिन इसे बाजार में मिले अच्छे समर्थन का ही नतीजा था कि वर्ष 2008 के आते-आते इसके कर्मचारियों की संख्या 1200 तक पहुंच गई। इसके अलावा पोर्टफोलियो में मोबाइल हैंडसैट, एसेसरी, कनेक्शन, रिचार्ज वाउचर, गेमिंग डिवाइस और डीटीएच कनेक्शन भी शामिल हो गये। बी.के. मोदी समूह की आईटी इनेबल्ड सेवा देने वाली इकाई ऑम्निया ने अपने बेहतरीन गुणवत्ता मानक और कुशल सर्विस डिलीवरी के दम पर विशाल बीपीओ बाजार में अपने लिये खास जगह बनाने में सफलता प्राप्त की है। ऑम्निया इनबाउंड और आउटबाउंड कस्टमर सेवा के साथ ही सेल्स मैनेजमेंट सेवायें दे रही है। इसके ग्राहकों में इंडियन एयरलाइन्स, डिश टीवी, आइडिया सेल्यूलर जैसी प्रति‌ष्ठित कम्पनियों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार सेवा कम्पनी महानगर टेलीफोन्स निगम लिमिटेड भी शामिल है। कम्पनी ने अपने पोर्टफोलियो का विविधिकरण करने के लिये रियल एस्टेट क्षेत्र में कदम रखा। स्पाइस वल्र्ड मल्टीप्लेक्स की स्थापना नोएडा में हुई।

स्पाइस वल्र्ड में मूवी के अलावा स्पोर्ट्स बार और फूड कोर्ट की सुविधायें जुटाई गई जिससे थोड़े समय में ही यह कारोबारी रूप से स्था
पित हो गई। इसकी सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2005 में स्थापित होने से लेकर वर्ष 2008 के मध्य तक स्पाइस वल्र्ड में आने वाले ग्राहकों की संख्या बीस लाख को पार कर गई। पिछले कु छ दिनों से बीके मोदी समूह फिर चर्चाओं में है। कम्पनी ने पिछले वर्ष अपने दूरसंचार कारोबार स्पाइस कम्यूनिकेशन को आदित्य बिडला समूह की कम्पनी आइडिया सेल्यूलर को 22 अरब रुपये में बेच दिया था। इस प्रकार कम्पनी के पास काफी मात्रा में नकदी थी। देश की प्रमुख आईटी कम्पनी सत्यम में घोटाला सामने आया तो उसके बिकने की चर्चा चली। बी.के. मोदी ने अपने पास उपलब्ध तरल पूंजी का लाभ उठाते हुये सत्यम को खरीदने के लिये बोली लगाकर सनसनी फैला दी। हालांकि सत्यम का सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है।

बाजार विश्लेषकों का मत है कि बी. के. मोदी समूह ने अपने पोर्टफोलियो का प्रबंधन काफी कुशलता से किया है। इसी कारण पिछले दो दशकों में यह अपने कारोबार को नई ऊंचाइयां देने में सफल रहा है। उदारीकरण से पहले के दौर में समूह के अनेक बहुरा‌ष्ट्रीय कम्पनियों के साथ संयुक्त उपक्रम थे लेकिन कम्पनी ने बाजार की नब्ज को पहचान कर इन सभी ज्वॉइंट वेंचरों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर अपने दम पर नये क्षेत्रों और बूमिंग क्षेत्रों में प्रवेश किया है। स्पाइस कम्यूनिकेशन में अपनी हिस्सेदारी बेचने से कम्पनी को 22 अरब रुपये नकद प्राप्त हुये हैं। हालांकि विश्व बाजार में मंदी का असर है। बड़ी-बड़ी कम्पनियों पर दिवालिया होने की तलवार लटक रही है, ऐसे में बी.के. मोदी समूह के कैश रिच होने से कम्पनी के पास नये क्षेत्रों में मुनाफे वाले सौदे करने के अवसर भी हैं।

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